Dharam Dasji Sahib Prarthana

सुरति करो मम साइयाँ, हम हैं भवजल माहिं। आपही हम बहा जायेंगे, जो नहिं पकरो बाहिं॥  में अपराधी जन्म का, नख शिख भरा विकार । तुम दाता दुख भंजना, मेरी करो सम्हार ॥ मुझ में गुण एको नहीं, जान ले शिर मौर। तेरे नाम प्रताप सौ, पाऊँं आदर ठौर॥ अवगुण मोरे बाप जी, बख्श गरीब निवाज। जो… Continue reading Dharam Dasji Sahib Prarthana