में अपराधी जन्म का, नख शिख भरा विकार तुम दाता दुख भंजना, मेरी करो सम्हार

में अपराधी जन्म का, नख शिख भरा विकार । तुम दाता दुख भंजना, मेरी करो सम्हार ॥ हे सतगुरु साहिब, में कई जन्मों से अपराध करते आया हुँ । मेरा पूरा शरीर विकारों से भरा हुआ है। हे साहिब आप ही दुखो का नाश करनेवाले हो। आप ही मुझे संभालिये। Mein Aparadhi Janam Ka, Nakh… Continue reading में अपराधी जन्म का, नख शिख भरा विकार तुम दाता दुख भंजना, मेरी करो सम्हार

सुरति करो मम साइयाँ, हम हैं भवजल माहिं आपही हम बहा जायेंगे, जो नहिं पकरो बाहिं

सुरति करो मम साइयाँ, हम हैं भवजल माहिं। आपही हम बहा जायेंगे, जो नहिं पकरो बाहिं॥ सहिबजी आप हम पर ध्यान बनाये रखना, हम इस संसार के भवसागर/दुखों के सागर में फसे है। अगर आप हमें नहीं पकड़ोगे तो हम बह जाएँगे । Surti Karo Mam Saeiya, Hum Hey Bhavjaal MaahiAap Hi Hum Baha Jayengey, Jo… Continue reading सुरति करो मम साइयाँ, हम हैं भवजल माहिं आपही हम बहा जायेंगे, जो नहिं पकरो बाहिं

Dharam Dasji Sahib Prarthana

सुरति करो मम साइयाँ, हम हैं भवजल माहिं। आपही हम बहा जायेंगे, जो नहिं पकरो बाहिं॥  में अपराधी जन्म का, नख शिख भरा विकार । तुम दाता दुख भंजना, मेरी करो सम्हार ॥ मुझ में गुण एको नहीं, जान ले शिर मौर। तेरे नाम प्रताप सौ, पाऊँं आदर ठौर॥ अवगुण मोरे बाप जी, बख्श गरीब निवाज। जो… Continue reading Dharam Dasji Sahib Prarthana